Rickshaw bala short moral story in hindi | पाप और पुण्य

एक सज्जन बाबु जी जोर से चिल्लाये ।
ओ रिक्शा बाले रहीम नगर जाने के कितने पैसे लोगे ।
रिक्शा बाला ।
बाबु जी 20  रूपए लुंगा ।।।

Rickshaw bala short moral story in hindi


बाबू जी बोले मै 10 रूपए ही दुंगा ।
रिक्शा बाला सोचने लगा दोपहर का वक़्त है और मेरे पास इतने भी पैसे नहीं है जो मैं अपने परिवार को एक वक़्त का खाना ही खिला सकु ।
फिर वो बोला ।
ठीक है बाबु जी बैठो ।

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रहीम नगर पहुँच कर बाबू जी जैसे ही रिक्शा से नीचे उतरे सामने से एक भिकारी आ गया ।
बाबू जी ने भिकारी को 20 रूपए दे दिए ।।।
ये देखकर रिक्शा बाला कहता है ।
मुझसे तो अच्छा यह भिकारी है जो आप ने इसे 20 रूपए दे दिये ।
और मेरी मेहनत के पूरे पैसे भी नहीं दिये ।।।

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बाबू जी ।
भिकारी को देकर मैने पुण्य कमाया है ।
रिक्शा बाला बोला ।
और आप ने जो मेरी मेहनत के पूरे पैसे भी नहीं दिए उसके लिए आप पाप के भागीदार नही ।
इतना सुनते ही बाबु जी ग़ुस्से से कहते है ।
तुम लोगो के मुह लगना ही फ़िजूल है ।।। 
Rickshaw bala short moral story in hindi | पाप और पुण्य Rickshaw bala short moral story in hindi | पाप और पुण्य Reviewed by Mohd sarfraj on February 15, 2017 Rating: 5

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